Friday, January 1, 2010

क्यों न दर्ज हो तिवारी के खिलाफ मुकदमा?

किसी बड़े बुद्धिजीवी की उक्ति है- हम कई औरतों से इसलिए प्रेम करते हैं क्योंकि दुनिया में बुद्धिमान लोगों की भारी कमी है...और इश्वर ने हमें इस विशेष काम के लिए भेजा है कि बुद्धिमान लोगों की आपूर्ति बनी रहे। एन डी तिवारी को बुद्धिजीवी के खांचे में रखने से बहुतों को एतराज होगा लेकिन एन डी ने इस उम्र में युवाओं को जरुर चुनौती दे दी है वे उनकी उर्जा और प्रतिभा का मुकाबला करें। यूं हमारी जनता शासक वर्ग के ऐसे मामलों को 'देवलोक' का मामला मानती रही है और उनके किसी कृत्य के लिए किसी 'खाप' पंचायत का इंतजाम अभी तक नहीं किया गया है। लेकिन सवाल ये है कि क्या एन डी तिवारी को महज उम्र और 'सार्वजनिक जीवन' में उनके 'योगदान'(!) की वजह से छोड़ देना चाहिए?

पक्ष-विपक्ष के नेताओं को मिलाकर तिवारी जैसे बिगड़ैल सांढ़ों का तंत्र इतना ताकतवर है कि वो किसी भी संपादक को वो चीज दे सकता है जो उसे अपने पूरे करियर में लालाओं ने नहीं दी होगी। इसलिेए उनसे किसी भी तरह की उम्मीदे पालना बेकार है। हां, गैरपरंपरागत मीडिया ने जरुर तिवारी के खिलाफ बोलना जारी रखा है। वो तो भला हो यू-ट्यूब का कि 'नारायण' के 'रासलीला' का आनंद जनता लाईव ले सकी।

लेकिन क्या तिवारी को महज राज्यपाल पद से हटा दिया जाना उनकी(या उसकी?) सजा है? तिवारी ने क्या गुनाह किया कि उसके पीछे लोग बल्लम-बर्छे लेकर पिल पड़े? दो वयस्क व्यक्तियों का आपसी सहमति से संबंध कैसे आपराधिक हो सकता है?

लेकिन तिवारी ने आपराधिक गलती की है--

1. राजभवन सेक्स कांड के बारे में कहा गया है कि तिवारी को ये महिलाएं इसलिए मुहैया कराई गई कि उन्होने खदानों के ठेके दिलवाने का भरोसा दिलाया था। अगर वाकई ऐसा था तो तिवारी पर भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज होना चाहिए और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
2. तिवारी जिस पद पर बैठे थे वहां वे प्रत्य़क्ष या अप्रत्यक्ष रुप से कई लोगों को उपकृत या उपेक्षित कर सकते थे। ऐसे में अगर ये महिलाएं तिवारी के पास किसी दवाब बस भेजी गई या हमबिस्तर हुई तो तिवारी पर बलात्कार के एंगिल से जांच होनी चाहिए।
3. तिवारी ने ऐसा कर के राजभवन की गरिमा को ठेस पहुंचाया है जिसको बरकरार रखने की बात उन्होने अपने पद की शपथ लेते समय कही थी। ऐसा करके उन्होने संविधान का उल्लंघन किया है और इसके लिए सिर्फ उन्हे पद से हटाया जाना काफी नहीं। एक उच्च कार्यालय में बैठने लायक विश्वसनीयता की उन्होने हत्या की है।
4 इस एंगिल से भी जांच होनी चाहिए कि क्या एक साथ कई महिलाओं के साथ संबंध बनाना अप्राकृति यौनाचार की श्रेणी में आता है या नहीं? क्या भारतीय दंड विधान में ऐसा प्रावधान है जो इसे कानूनन सही मानता है?

तिवारी को जो सजा मिली है वो सिर्फ पॉपुलर सेंटीमेंट्स को तुष्ट करने के लिए मिली है न कि उनके वास्तविक अपराधों के लिए। यहां सवाल नैतिकता का बिल्कुल नहीं है-सवाल इसका है कि उन्होने संविधान का शपथ लेकर उसकी धज्जियां उड़ाई है और सत्ता के शीर्षस्थलों में से एक राजभवन में भ्रष्टाचार के साथ रंगरेलियां की है। एन डी तिवारी एक बड़े अपराधी हैं और उनके कारनामों की जांच होनी चाहिए और जबजक वे पाकसाफ नहीं करार कर दिए जाते उनसे तमाम सरकारी सुविधाएं और उनका पेंशन छीन लिया जाना चाहिए।

(ये लेख 'जनतंत्र' पर आ चुका है- http://janatantra.com/2010/01/01/sushant-jha-on-n-d-tiwari-sex-scandal/

3 comments:

Suman said...

लोकसंघर्ष परिवार की तरफ से हार्दिक शुभकामनाएं

परमजीत बाली said...

कुछ नही बिगड़ने वाला इन का.....


आप को भी सपरिवार नव वर्ष की शुभकामनाएं।

Krantikari Sipahi said...

Sushant aapne hamesha ki tarah acha likha hai par abhi tiwari scandal par kuch bhi kahna jaldbaji hogi. kahi aisa na ho ki Anara Gupta case ki tarah is case ka bhi faluda nikal jaye.